Thursday, July 8, 2021

आफन्तका १२ शीत book

 
शीत 
चिसो 
प्रित 


मिठो।। १ 
----
चन्द्र 
दाग 
मन्द 
आग।।२ 
----
लुट्यौ 
कुट्यौ 
चुट्यौ 
फुट्यौ।।३ 
----
च्याट्ट 
मायाँ 
फ्याट्ट 
मायाँ।।४   
----
मन 
चोखो 
तन 
भोको।।५
----
आफ्नै 
सारा 
अश्रु 
धारा।।६ 
----
सु:ख 
आफ्नै 
दु:ख     
आफ्नै।।७ 
----
बैभ (व) 
लागे 
दैव 
भागे।।८ 
----
झरी 
पर्‍यो 
चरी 
मर्यो।।९  
----
घर 
भित्र 
बैरी 
मित्र।।१०
----
डुलें 
देश 
फूले 
केश।।११    
----
खल्लो 
साँझ 
झल्लो 
साथी।।१२  

No comments:

Post a Comment

gazal sent to Utsab sir

मनभरिका मृगतृष्णा, आखाभरि सपना छन्  आखिर किन जिन्दगीसंग भाग्ने चाहना छन्  निन्द्रा छैनन् मखमली बिस्तारामा आज फेरी  नदीकिनार बालुवाका ती महल ...